प्रश्नोत्तर P12-0114 · भाग 12
भरपाई करते वक्त क्या मुझे यह भी देखना पड़ेगा कि मैं सिर्फ अपने हिस्से का दूं, और अगर मेरे आश्रित पांच-सात लोग हैं तो उनमें कटौती ना करूं — चाहे सामने कोई गैर मर रहा हो?
एकदम। भरोगे कैसे? फंस जाओगे। सर्वप्रथम अपने को बचाना है। अगर एक हमारे सामने मर रहा है, तो पता नहीं उसका नेचर कैसा है, मरने वाले का कर्म कैसा है; लेकिन मुझे तो अपने कर्म का भी पता है, स्वभाव का भी पता है। तो पहले मुझे अपने आप को बचाना है, फिर मेरे से जितने लोग जुड़े हैं उनको बचाना है, और अगर उससे कुछ बचता है तो और लोगों को बचाना है। लेकिन हम क्या करते हैं? दिखावे के चक्कर में उसको बचाते हैं, और जितने लोग तुम्हारे साथ जुड़े हैं — जिन्होंने तुम्हारे लिए कुछ किया, जिन्होंने तुम्हें उठाया — उन्हीं का गला काटते हैं, उन्हीं को वैल्यू नहीं देते, उन्हें दबाते हैं। तो जीवन में याद रखना: सर्वप्रथम खुद, उसके बाद मेरे से जुड़े लोग, उसके बाद बचता है तो कोई और — और नहीं तो नहीं। क्योंकि अगर मैं कुछ हूं, तो जितने लोग मुझसे जुड़े हैं उनके द्वारा हूं; वही मेरे आधार हैं। हम सज्जन बनने के चक्कर में चाहते हैं कि लोग कहें बहुत बड़ा आदमी है, इसके अंदर कितनी मानवता है — और बाद में पता चलता है कि वो दो कौड़ी का भी नहीं समझते। गड़बड़ यहीं होती है कि जो मुझे उठाए हैं, उन्हीं को मैं छोड़ देता हूं; फिर ऐसे लोग कहीं के नहीं होते। नए-नए लोग वाहवाही करें, इसलिए पुरानों को धक्के मारकर हटा देते हैं — ये मान की भूख है। मैं उतना ही खाली हूं, जितना मैं बाहर से किसी के माध्यम से भर रहा हूं।
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वीडियो: बिना हिसाब के तू जा नहीं पाएगा #योगी · 2026-09-17