प्रश्नोत्तर P12-0146 · भाग 12
गुरु जी, आपने जो कहा था — जो था, है और रहेगा — क्या उसको अपना लें?
अरे बाबा, उसको अपनाने की जरूरत नहीं है। जिसका नाश होगा, बस उसको छोड़ दो, खत्म बात। जो था, है और रहेगा, उसको अपनाने की क्या जरूरत है? नाशवान वस्तुओं पर ही ध्यान लगाओगे तो उसी में फंसे रहोगे; पृथ्वी पर ऐसा कुछ नहीं जहां ध्यान लगाओ और वो था, है और रहेगा। अगर वहां पहुंच गए तो बात ही खत्म — ध्यान भी खत्म, मिलना ही हो गया। महापुरुषों ने कभी नहीं कहा कि ईश्वर पर ध्यान लगाओ; उन्होंने बस इतना कहा — ईमानदारी और सत्कर्म करते हुए, जरूरतमंद की सेवा करते हुए निकल लो। एक महापुरुष कहता है पहले तेरा, बाद में मेरा; और हम कहते हैं पहले मेरा, बचेगा तो तेरा। इतने में ही ज्ञान-अज्ञान छिपा है — वो तेरा तक पहुंच जाता है और हम मेरा-मेरा में जन्म-मरण के चक्र में फंसे रहते हैं।
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वीडियो: मुझे ध्यान समझ में नहीं आया ध्यान कैसे करूं ? #योगी · 2026-07-04