प्रश्नोत्तर P12-0152 · भाग 12
मेरे अंदर एक आवाज आती है, सपने जैसी — ध्यान में कुछ बजता हुआ सुनाई देता है। (पहले जो ध्यान करता था, वो भी अब छोड़ दिया, अब बस बैठा रहता हूं; एक बार हेडफोन लगाया तब नोटिस हुआ कि कुछ बज रहा है।) इसका क्या करूं?
बहुत लोगों के साथ ऐसा हो रहा है। एक शिक्षिका मिली थीं, उन्होंने ध्यान का प्रयोग किया, फिर बोलीं बहुत गड़गड़ाहट की आवाज आती है। पहले उससे खुशी मिलती है कि कुछ नया है, लेकिन बाद में आदमी को बहुत घुटन होने लगती है, नींद नहीं आती, व्याकुल-बेचैन होकर बैठता-उठता है। आप ऐसी विधियों का प्रयोग क्यों कर रहे हो? इतिहास में किसी का नाम है जो ध्यान के द्वारा पहुंचा हो, या किसी ने ध्यान करवाकर किसी को पहुंचाया हो? अब जो चीज मिली है, उसे बस दृष्टा भाव से देखो — उसका आप कुछ नहीं कर सकते, वो जो करना चाहे करे; उस पर ध्यान मत दो, धीरे-धीरे उसे भूल जाओ। जितनी भी व्यर्थ की चीजें हैं, वो पहले करना बंद करो; ये स्वाभाविक होता है, इसके लिए कुछ करना नहीं है। उपलब्धि उन्हीं को हुई है जो सब करते-करते आखिर में थक गए — एक दिन में नहीं, कई सालों में — और उनके पास करने के लिए कुछ नहीं बचा; अर्जुन भी आखिर में 'मुझे कुछ नहीं चाहिए' पर आ गए। कुछ करके जो मिलेगा, वो अस्थाई होगा, क्योंकि जिस साधन से कर रहे हो वही अस्थाई है।
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वीडियो: कोई रास्ता दिखाओ... #योगी · 2026-07-12