आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P12-0154 · भाग 12

कभी-कभी ऐसा अनुभव होता है कि अंदर से ऊर्जा का प्रभाव कई गुना ज्यादा होता है, और कभी इतना निम्न स्तर पर चला जाता है — इसका क्या करें?

दोनों को देखो — दोनों में तुम हो। दोनों को दृष्टा भाव से देखो और दोनों से सुख-दुख का त्याग करो; ना ये चाहिए, ना वो चाहिए। एक अच्छे का अनुभव है, एक बुरे का; दोनों अनुभव अलग हैं, इसलिए दोनों मुझसे अलग हैं, और मैं दोनों से परे हूं। दोनों को महसूस करने वाले को पकड़ो — जो कह रहा है कुछ है और जो कह रहा है कुछ नहीं, जो कह रहा है हो जाएगा और जो कह रहा है नहीं होगा — उस निर्णयकर्ता को पकड़ो: ये निर्णय कौन कर रहा है, किसको लग रहा है ये ठीक है और ये ठीक नहीं? जो पहले से मौजूद है, वो होने और ना होने से परे है। होगा तो भी भ्रम है, नहीं होगा तो भी भ्रम है। सामने का दृश्य ना सच है ना झूठ — ये पेड़ पहले नहीं थे और आने वाले समय में नहीं रहेंगे; परिवर्तनशील 'है' बदलता है तो तकलीफ होती है, क्योंकि जिसमें वो सुख ले रहा है उसमें परिवर्तन वो बर्दाश्त नहीं कर पाता। उसने अपने आप को अस्थाई में फंसा लिया है और उसे स्थाई करना चाहता है — यही उसकी अपूर्णता है। उसे पता है, तभी तो भटक रहा है; मंदबुद्धि या पागल कभी नहीं कहता मैं भटक रहा हूं। अगर पता चल गया कि मैं भटक रहा हूं, तो इसका मतलब आप अपने आप को भटकने से मुक्त करा सकते हो। भटकने में बहुत समय लगा है, छुड़ाने में भी समय लगेगा; किसी के कह देने से मत करो, करने से पहले उसका परिणाम पता लगाकर करो — ये प्रत्यक्ष ज्ञान है, अगर मैं भी कह दूं कि ये सब गलत है तो आप मान नहीं सकते, क्योंकि समझकर यात्रा करनी है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: कोई रास्ता दिखाओ... #योगी · 2026-07-12