प्रश्नोत्तर P13-0010 · भाग 13
"नाम जपूं ना हरि भजूं, मुख से कहूं ना राम; मेरा साईं मो को भजे, तब पाऊं विश्राम" — गुरुदेव, यह दोहा आप पर सार्थक होता है।
ईमानदारी से अपना काम करें, फिर चाहे राम का नाम लें या न लें, पूजा-कर्मकांड करें या न करें। एकदम कर्म का सिद्धांत समझो और आगे बढ़ो।
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