आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P13-0042 · भाग 13

गुरु जी, कई बार विचार आता है कि कोई बात नहीं, धीरे-धीरे पार उतर जाएंगे। पूरी ईमानदारी से जीवन जीने में घर-परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल से होगा, दुनियावी तकलीफें सहनी पड़ेंगी, तो मन पीछे हो जाता है कि एक-दो-चार जन्म और लग जाएंगे; ज्ञान तो आ ही गया, ईमानदारी-सत्कर्म-सत्संग पर चलते रहेंगे, धीरे-धीरे कल्याण हो जाएगा।

मेरे प्रत्यक्ष मार्ग पे वही चल रहा है, जिसने ईमानदारी को पूरी तरह धारण कर लिया। जब धारण नहीं किया, तो गुरु को अपनाया ही कहां? फिर गुरु तुम्हारे साथ कहां है? तब तो एक भ्रम है। जब तू पूरी तरह ईमानदारी अपना लेगा, तब वो तेरे साथ है; उसी में परीक्षा होगी, उसी में सब कुछ आ जाएगा। धीरे-धीरे क्यों? उस परम स्थिति में मैं इसी शरीर में रहूं ना। अगर कल होना है, तो आज क्यों न हो जाए — कम से कम मैं उस परम स्थिति में जिऊंगा। धीरे-धीरे नहीं, जितनी जल्दी हो सके; कैसे भी अपने आप को पार करा लो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: प्रत्यक्ष ज्ञान का डमरू दमोपुर शिव मंदिर में · 2026-09-04