प्रश्नोत्तर P13-0115 · भाग 13
जब हम ईमानदारी या सेवा करते हैं तो हर बार संशय आता है कि इस कर्म को करना चाहिए या नहीं, यह मेरे अधिकार में है या नहीं। कौन से कर्म छोड़ने हैं और कौन से कर्म करने हैं?
बहुत सीधी सी बात है। जब भी आप कोई कर्म कर रहे हो तो ऐसा मत करो कि आपके द्वारा किसी को तकलीफ हो, और कर्म करते हुए ईमानदारी सबसे जरूरी है — ईमानदारी और सत्कर्म। मैं तो यही सिखाता हूं — सेवा। अदलपुरा में भी, यहां भी मैंने यही सिखाया है कि भूखे को भोजन, प्यासे को पानी। कोई भी अगर आए, दूर भी दिखे, तो उसे बुला के बिस्किट दो, पानी पिलाओ, बैठाओ। आपके पास जो भी है — बिस्किट है, मीठा है — एक गिलास पानी लेके खड़े हो जाओ: ये लो, खा लो और पानी पी लो। रास्ते में कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है तो आप पानी की व्यवस्था कर दो। पता चला एक नल गड़ा है तो उसके बगल में दूसरा नल मत गड़वाओ — अहम भाव के कारण नहीं। जहां जरूरत हो, आवश्यकता हो, वह देखो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: 14 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-07