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प्रश्नोत्तर P13-0160 · भाग 13

घर में घुटन थी इसलिए मैं मौन रहता था; यहां आजादी है तो हंसी आ जाती है, मुस्कुरा लेता हूं। फिर लगता है कहीं इससे साधकों की साधना में बाधा तो नहीं। कैसे रहना है — मौन, मुस्कुराना, बातचीत — कुछ समझ में नहीं आ रहा, तो सोचा शायद घर चला जाऊं।

यहां का नियम है ना — कम से कम सात दिन रहना है। हम अगर कहीं से जाते हैं तो ऐसा करके जाएं कि मैं फिर वहां आ सकूं — जगह आने लायक छोड़ के जाऊं। तो धीरे-धीरे समझो, समझ में आ जाएगा। और एक समय ऐसा आएगा कि समझ के पार चले जाओगे — वही तुम हो। अभी जब तक समझ है, तब तक तुम उसमें लिप्त हो। एक दिन ऐसा आएगा कि समझ के पार चले जाओगे, वहां तुम हो, वहां तुम अपने आप को पाओगे। लेकिन ये समझते-समझते होगा। समझ से भी छूटना है, लेकिन समझ के समझ से छूटना है — आप सीधा नहीं छूट सकते। और समझ से जब छूट जाओगे, तो वही तुम हो। उसके बाद ही आत्मज्ञान होता है।

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वीडियो: समझ के समझ से छुटना है #योगी · 2026-08-13