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प्रश्नोत्तर P13-0167 · भाग 13

गुरु जी, जन्म से कोई ब्रह्मचर्य का पालन करता है तो कोई संसार के भोग भोगता है — तो किसको आत्मज्ञान होता है?

दोनों को नहीं होता है। जैसे एक पागल है, मंदबुद्धि है, तो भोग से उसे मतलब ही नहीं है। भोग तो कृष्ण भगवान ने भी किया, राम ने भी किया — तो बच्चे कैसे पैदा हो गए? गुरु नानक के दो बच्चे थे; कई ऐसे महात्मा हो गए। ईमानदारी ब्रह्मचर्य है। शरीर का ब्रह्मचर्य रखने से क्या होगा? चले जाओ पागलखाने में — बचपन से पागल है, मंदबुद्धि है, पूरा ब्रह्मचर्य है — क्या हो गया? उससे कुछ नहीं होगा। एक और नया अहंकार कि देखो मैं ब्रह्मचारी हूं। राग-द्वेष पैदा हो जाएगा, दूसरों को आप तुच्छ समझेंगे। ईमानदारी ब्रह्मचर्य है — ईमानदार रहो बचपन से, वो ब्रह्मचर्य है, उस ब्रह्मचर्य को रखो। शरीर का ब्रह्मचर्य रखोगे तो अहंकार हो ही जाएगा।

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