आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P13-0196 · भाग 13

गुरु जी, नौ द्वारों में जब भी हाथ लगाएं तो हाथ धो लें — इससे क्या होता है?

क्योंकि आप एक सामाजिक प्राणी हो, और आप अपने हाथ से सम्मान का आदान-प्रदान करते हो। इससे एकाग्रता बढ़ती है आपकी। हम लोगों की अक्सर आदत होती है आंखों में हाथ लगाने की — नहीं होनी चाहिए। इससे सहनशीलता भी बढ़ती है, सहन शक्ति भी बढ़ती है। अगर आप हर समय कहीं ना कहीं हाथ लगा रहे हो, तो आपकी उतनी एकाग्रता नहीं रहती, ध्यानपूर्वक आप फिर काम नहीं कर पाते। ये भी सीखनी चाहिए। मैं तो टोक देता हूं — नौ दरवाजों में जब भी हाथ लगाओ तो हाथ धो लो। हर समय लगाने की क्या जरूरत है? नौ दरवाजों से गंदगी निकल रही है; जब साफ करना हो, जाके धो लो। हाथ में रुमाल क्यों होता है? कि आप छींक रहे हैं तो रुमाल लगा लें, नहीं तो हाथ लगा लें और जाके हाथ धो लें। शुद्धता होनी चाहिए। बाहरी शुद्धता से आंतरिक शुद्धता होती है। बाहरी शुद्धता जरूरी है। अपने आप स्वच्छता करके देखिए।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: प्रेम और आनंद में कैसे रहें ? - aadhyatmik pratyaksh gyan Yogi #livesatsang · 2025-04-20