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प्रश्नोत्तर P14-0094 · भाग 14

गुरु जी, ईमानदारी से निकलने का रास्ता आपने सही बताया, मगर करुणा बंधन बन रही है।

अगर आपके पास कोई शराबी आया, रोने लगा, पांव पकड़ लिया कि पीने के लिए पैसे दे दो, और आपने दया-करुणा कर दी — तो यह दया-करुणा ठीक नहीं, वह उस पैसे से अपनी बर्बादी करेगा। ऐसी करुणा मत करिए जो प्राकृतिक ना हो। दया-करुणा वहां करिए जिससे सामने वाले का ग्रोथ हो — बाहरी भी, आंतरिक भी। अगर बाहरी ग्रोथ हो रहा है और आंतरिक गिर रहा है, तो कोई मतलब नहीं; फिर आप भी किसी लालच में फंसे हो — या तो वैभव का, या मान का; बस दो ही लालच में लोग फंसते हैं। अगर करुणा बंधन बने तो ऐसी करुणा किस काम की — आप सामने वाले को भी बंधन में बांध रहे हो। जिससे उसका आत्मिक स्तर उठे, उसके लिए उसे मार्ग बताओ, तब बंधन नहीं होगा। और ये सिद्धियां नर्क के द्वार हैं — इनके चक्कर में लोग नाम, शोहरत, पैसे के लिए घूमते हैं।

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वीडियो: ईश्वर सर्वव्यापी है इसका क्या मतलब है / #ईश्वर #सर्वव्यापी · 2024-04-10