प्रश्नोत्तर P14-0107 · भाग 14
गुरु जी, गुरु ही अंतरात्मा है, रास्ता सब दिखाते हैं, लेकिन नारायण अपना होता है — गुरु और सतगुरु क्या है?
अपने में गुरु, सतगुरु ढूंढना है। गुरु शब्द है, शरीर नहीं। गुरु के द्वारा सतगुरु तक पहुंचना है — अपने स्वयं तक पहुंच गए, सत हो गए, गुरु छूट गया; और जब आप किसी के लिए बोलेंगे, तो यह हो गया सतगुरु। यही सतगुरु की परिभाषा है।
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