प्रश्नोत्तर P15-0009 · भाग 15
जो जगत के भोगों और इच्छाओं से आलसी हो गया, वही आत्मज्ञान का बड़ा काम कर सकता है?
आलसी नहीं, चैतन्य हो गया, जागरूक हो गया — जो ये देख पाया कि इसमें कुछ भी नहीं है, और पूरी संपन्नता में स्वभाव में निकलता है। तीन तरह के साधक गृहस्थ जीवन से निकलते हैं: स्वभाव वाला, कुभाव वाला और अभाव वाला। स्वभाव वाला आत्मज्ञान की, स्वयं की खोज में जाता है; कुभाव वाला झगड़ा करके निकला है, तंत्र-मंत्र में चला जाता है, लोगों को दबाएगा; और अभाव वाला धन के चक्कर में घूमता है। अभाव और कुभाव वालों की भीड़ खूब है, स्वभाव वालों की संख्या बहुत कम है। जो स्वभाव में निकला, वो बिना खोजे रह ही नहीं पाएगा।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: कर्ता कौन है, अकर्ता कौन है ?| Who is the Doer ? Who is the Non-Doer ? #yogijikasatsang · 2026-05-18