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प्रश्नोत्तर P15-0136 · भाग 15

गुरु जी, पत्नी को दीक्षा क्यों नहीं लेनी चाहिए?

देखो, पति-पत्नी जब शादी करते हैं और स्त्री के गर्भ से बच्चे का जन्म होता है, तो वो मां बनती है, एक बाप बनता है; लेकिन कौन पहले मां बनी, कौन पहले बाप बना — यह कोई बोल नहीं सकता। कहने का मतलब, पुरुष ने अगर दीक्षा ले ली तो स्त्री को दीक्षा लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह स्वयं आदिशक्ति, जगतजननी है; उसमें स्वयं ये क्षमता है कि अपने बच्चों को वो खुद पाल सकती है। वह पति के साथ है; एक बार उसने पति का साथ स्वीकार कर लिया है, तो उसे और किसी के साथ नहीं होना चाहिए — या तो फिर उस पति को छोड़ दे, जैसे मीराबाई ने छोड़ा तो संत रविदास जी को जाकर गुरु बनाया। लेकिन सीता माता, रुक्मिणी, सत्यभामा — देखिए उनका कोई गुरु था? राम जी के गुरु थे, कृष्ण के गुरु थे, सुदामा के गुरु थे, लेकिन सुदामा की पत्नी के गुरु? आपने अगर पुरुष का साथ स्वीकार किया है तो आपको जरूरत ही नहीं; आप स्वयं मां हैं। आप तो ईमानदारी से जीवन जियो, सत्कर्म करो — ऐसे ही तार सकती हो अपने आप को। इतना समझने के बाद भी अगर लग रहा है मुझे लेना चाहिए, तो लो; हम मना नहीं कर रहे हैं।

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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11