प्रश्नोत्तर P15-0146 · भाग 15
महाराज जी, कृपा करके बताइए कि कोई आत्मज्ञानी महात्मा अपने मन को किस प्रकार देखते हैं?
कुछ नहीं, उन्हें देखने की जरूरत होती नहीं। वह मन को क्यों देखें? और कोई काम नहीं है क्या? अरे, अपना काम करते हैं। मन को देखने की जरूरत आपको भी नहीं; लेकिन क्या करोगे, आपको फंसा दिया गया है। सालों-साल से आप रट रहे हो — मन को रोको, मन को रोको। इतना समझने के बाद भी सीधा-सीधा निकल नहीं पा रहे हो, सोचो जरा।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11