प्रश्नोत्तर P15-0180 · भाग 15
मेरे भगवान, आप बोलते हो "निकल लो" — निकलना कहां से है? जाना तो यहीं है।
निकल लो मतलब जहां उलझे हुए हो, वहां से निकल लो, बस। और अगर नहीं उलझे हुए हो तो बात ही खत्म — तब निकलने की क्या जरूरत है? तो आप निकले हुए हो। (और कोई कहे कि सृष्टि हमारी इच्छा से रची गई है, हम इसे चला सकते हैं — तो चलाओ; हम तो निकल रहे हैं, मुझे अब नहीं चलाना है।)
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11