प्रश्नोत्तर P15-0199 · भाग 15
गुरु जी, सठ और मूर्ख में क्या अंतर है?
मूर्ख वह होता है जो समझाने के बाद भूल जाता है, समझने के बाद भी याद नहीं रहता। पर देखेंगे तो उसकी भी गलती नहीं है — उसकी समझने की क्षमता ही नहीं है, जब समझने का स्तर ही नहीं है तो बेचारा क्या करे। और अगर आप किसी को मूर्ख कह रहे हैं, तो मूर्ख आप हैं — क्योंकि आप समझ के कह रहे हैं कि इसको समझने की क्षमता नहीं है, फिर भी उसे मूर्ख बोला। वह तो अपनी स्थिति में जी रहा है, संघर्ष कर रहा है; आपने उसे मूर्ख बोला तो आप महामूर्ख। सठ मतलब सनकी — उसके पास समझ भी है, पर वह सनक जाता है, आवेश और जज्बात में आ जाता है; "सठ सुधरहिं सतसंगति पाई" — अच्छी संगत मिल जाए तो सठ सुधर सकता है। बेवकूफ वह है जिसके पास समझने की क्षमता है, समझाने वाला सामने है, पर समझना नहीं चाहता। और जो समझ गया कि यह बेवकूफ है, फिर भी उसे समझा रहा है, वह महा बेवकूफ है। ये स्टेजेस हैं, हर एक को इनसे गुजरना पड़ेगा। रामायण में राम बनने के लिए वशिष्ठ, विश्वामित्र, और रावण, कुंभकरण, मेघनाथ, विभीषण, हनुमान — ये सब बनते हुए जाना है; यही पात्र हम सब में भीतर भरे हुए हैं।
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वीडियो: कोई प्रश्न ना होने के बाद कौन सा प्रश्न होना चाहिए ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-16