प्रश्नोत्तर P16-0109 · भाग 16
आपसे बात करने में डर लगता है। जैसे ही बोलने लगता हूं, रोना आ जाता है, गला भर आता है। लगता है कोई गलती ना हो जाए।
क्यों डर लगता है? डर के पीछे कोई कारण होगा। यहां गलती करने के लिए तो कुछ है ही नहीं; डरना नहीं चाहिए ना। डर किस बात का? अपना कल्याण करो। गलतियां तो होती हैं — अपराध ना हो, जानबूझकर करना ना हो। गलतियां तो हो ही जाती हैं, क्योंकि हम सीखने वाले हैं; हमसे हजारों गलतियां हो सकती हैं। कभी सही होगा, कभी गलत होगा। तो गलतियां हो जाएं, हो जाएं, लेकिन समझ के अपराध ना हो। अब डरना मत, डर को हटाओ, खुल के बात करो। और जिसके सामने डर है, वहां डर का कारण जानो — क्या सच में वो डरा के रख रहा है? तब तो वो गुलाम बना लेगा। लेकिन अगर डर का कारण वो नहीं है, सिर्फ मैं हूं, मेरा भ्रम है, तो उस भ्रम को हटाओ और खुल के बात करो। दबाव-संकोच में कल्याण नहीं होता है। दबाव-संकोच को हटाओ और खुल के बात करो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: ईमानदार तो सिर्फ ईमानदार #योगी · 2026-02-28