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प्रश्नोत्तर P16-0140 · भाग 16

बीड़ी-चिलम पीने से ध्यान एक जगह एकत्रित हो जाता है; उसके इंतजार में यह एक सहारा है। बीड़ी छोड़नी जरूरी है क्या?

चिलम पीने से मिलेगा? एकत्रित होता है तो एक क्यों पी रहे हो, पूरा दिन पीते रहो। ध्यान से कुछ नहीं होता, बाबा, वह चाहिए। जैसे एक मां अपने बच्चे को खोजती है, नशेड़ी जैसे नशे को खोजता है, भूखा जैसे भूख लगने पर भोजन को खोजता है, रोगी जैसे ठीक होने के लिए दवा खोजता है — वैसे खोजो। खोजी बनो, पागल हो जाओ। वह चाहिए कि सब चाहिए? सब है तो वह नहीं; वह है तो सब नहीं — बस खत्म। पहले वह मिले, उसके बाद जैसी व्यवस्था रहेगी, मिलने के बाद देखा जाएगा — वह बाद की बात है। अगर सच में दर्शन चाहिए तो उसके अलावा कोई काम मत करो; नहीं तो ऐसे ही खोजते रहोगे, व्यवस्थाओं का उपयोग करोगे, मजा लोगे और खोजते रह जाओगे। या तो दिन, या तो रात; या मर गए, या जिंदा हो — दो में से एक ही हो सकता है, दोनों नहीं; दो नाव पर चढ़ोगे तो फट के मरोगे, एक नाव पर सवार हो जाओ। पहले व्यर्थ की चीजें छोड़ दो — बीड़ी और गांजा; नशे से नाश होता है, मिलता कुछ नहीं। अल्पाहार लो: दो मोटी रोटी खाते हो तो एक कर दो। अब देखो, आपके लिए वह जरूरी है कि यह जरूरी है? जरूरी तो वही है — तब सब छोड़ दो।

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वीडियो: कुछ बातें कुछ यादें कुछ सत्संग / #बातें #यादें #सत्संग · 2024-01-14