प्रश्नोत्तर P16-0144 · भाग 16
तो गुरु जी, एक आदमी में दोनों ऊर्जाएं भी हो सकती हैं? कौन सी जागृत होती है?
देखिए, वह मानव तन में पैदा हुआ। अगर उसने मानव प्रवृत्ति — परोपकार की प्रवृत्ति — अपना ली, तब सात्विक जागृत होगी; और अगर उसने राजसी या तामसी अपना ली, तो अलग ऊर्जा जागृत होगी। राजसी अपनाए तो पॉजिटिव ऊर्जा आएगी, लेकिन वह सात्विक ऊर्जा से अलग होगी — राजसी ऊर्जा लोगों को दबाएगी, राज करेगी। परोपकार करोगे तो सात्विक ऊर्जा रहेगी; वह सबकी मदद करेगी — सामने कोई भी आ जाए, राक्षस आए या देवता, उसका काम है सेवा करना; उसे किसी से कुछ नहीं चाहिए, वह अपने आप को तारने में लगा रहता है। राजसी वाला अपने आप को बनाने में लगा रहता है — सबको खिलाता है, दान देता है, दान देकर पुण्य अर्जित करता है, और लोगों पर विजय प्राप्त करना चाहता है कि मैं कुछ हूं। तामसी वाला भी अपने आप को बनाने वाला है, उसकी नेगेटिव ऊर्जा जागती है — वह सबका शोषण करता है, सबको सताता है। तो राजसी अपनाई तो देवता वाली, तामसी अपनाई तो राक्षस वाली ऊर्जा, और मानव में रहा तो परोपकार में लगा रहेगा — सात्विक ऊर्जा उसे अपने आप से मिलाएगी।
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वीडियो: ऊर्जा के बारे में रहस्यमय ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #ऊर्जा रहस्यमय #ज्ञान #satsang · 2024-08-02