आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P16-0157 · भाग 16

गुरु जी, ज्ञान प्राप्त होने के बाद इंसान को कैसा महसूस होता है?

शादी तो आप लोगों ने की होगी — जिस दिन गौना आया, उस दिन का माहौल, वह खुशी; जिस दिन बाप बने, जिस दिन कोई मां बनी — क्या वह आप शब्दों में व्यक्त कर सकते हो? महसूस कर सकते हो, व्यक्त नहीं। यही कह सकते हो कि महसूस करना है तो विवाह कर ले और बाप बन जा, और कोई रास्ता नहीं। जब भौतिक जगत की बातें आप व्यक्त नहीं कर पा रहे हो — जिन्हें इंद्रियों द्वारा महसूस किया है — तो आत्मिक बात, जो शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श के बाद, इंद्रियों से परे जाकर हुई, उसे किन शब्दों में पिरोया जाए? लोगों ने पूछा तो मैंने कोशिश की, लेकिन उसे बताने के लिए शब्द बनते ही नहीं — शब्द उठाना चाहता हूं तो मुस्कान, हंसी आ जाती है। उसे आनंद बोलो, जो भी नाम दो — उसे नाम भी नहीं दिया जा सकता। आत्मज्ञान शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श से परे है। बस उससे ज्ञान निकल रहा है, उससे पता चल सकता है — जैसे कोई मां-बाप बने तो उनके बच्चे देख लो, लेकिन उस एहसास को वे नहीं बता सकते। उस स्थिति में पहुंचकर अनुभव करना पड़ेगा।

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वीडियो: पांच तत्वों का हमारे जीवन में महत्व / #पांच #तत्व #aadhyatmik #satsang · 2024-09-06