प्रश्नोत्तर P16-0172 · भाग 16
(लाइव) कुंडलिनी शक्ति जागृत करने के लिए चक्र-ध्यान कैसे करें? आत्मज्ञान की स्थिति कहां पर बनती है? कहा गया है कि आज्ञा चक्र के बाद जब सहस्रार खुलता है तब आत्मज्ञान होता है।
बस सत्कर्म करो, सब जागृत होते चले जाएंगे। आत्मज्ञान की स्थिति "कुछ नहीं चाहिए" में बनती है। यह बात सही है कि सहस्रार खुलेगा तभी कुछ होगा — रास्ता यही है, बिना इसके खुले आत्मज्ञान नहीं होगा; जो ध्यान लगवाते हैं वे भी इसी तरफ इशारा करते हैं। लेकिन गलती यहां हो रही है कि यह देखने से नहीं खुलेगा। कोई शोरूम के सामने खड़ा करके कह दे कि गाड़ी को देखते रहो, तो देखने से गाड़ी खरीद लोगे? गाड़ी दिखा दी, अब जाओ पैसा कमाओ — कर्म करना पड़ेगा, पैसा कमाकर लाइए, तब गाड़ी या बंगला ले लीजिए। आप जब योग्य हो जाएंगे तो यह अपने आप खुल जाएगा। आपने इसे बंद किया है — आपके कर्म की वजह से बंद हुआ है, तो कर्म की वजह से ही खुलेगा। इस सिद्धांत को दुनिया नहीं समझ पा रही। कुछ बदलना है तो कुछ करना पड़ेगा, और वह भी सही तरीके से।
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वीडियो: पांच तत्वों का हमारे जीवन में महत्व / #पांच #तत्व #aadhyatmik #satsang · 2024-09-06