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प्रश्नोत्तर P17-0036 · भाग 17

गुरु जी, वो चीज अभी क्लियर नहीं हुई — "गुरु साक्षात परब्रह्म" में तो गुरु और परब्रह्म दोनों को एक ही बोला गया है; तो दोनों एक हैं या अलग-अलग?

अब आप पूछोगे कि दोनों एक ही हैं कि अलग-अलग, तो आपसे कहा जाएगा — अलग-अलग। क्यों? क्योंकि आप द्वैत में खड़े हो, राग-द्वेष में हो; आपसे एक नहीं बोला जा सकता। अगर कह दिया जाए कि दोनों एक ही हैं और आपको पक्का हो जाए, तो आपकी यात्रा ही नहीं होगी — क्योंकि आप जान नहीं पाए, समझ नहीं पाए, बस मान लिया कि ये तो मिल गए, तो आगे यात्रा क्यों करना। और आप रूप को पकड़ोगे — फिर फंस गए, गुरु के पिंड में फंस जाओगे। आप इस पिंड के पीछे देख ही नहीं पा रहे; आप में इतनी क्षमता नहीं कि पिंड के अंदर वाले को पकड़ लो, क्योंकि आप अपने पिंड के अंदर वाले को आज तक नहीं पकड़ पाए। इसलिए कहा जाता है कि दो हैं — गुरु अलग है, ब्रह्म अलग है; वो निराकार है, ये साकार। अब इस पिंड को माध्यम बनाकर, इसके द्वारा जो ज्ञान निकले, उस ज्ञान के द्वारा अपने आप तक पहुंचो, और अपने द्वारा उस तक पहुंचो। जिसका सहारा ले रहे हो वो अलग नहीं है, लेकिन आपके लिए अलग है — तभी आप उस तक पहुंचोगे। जिस पिंड को देख रहे हो उसका नाश हो जाएगा; ये बस काम करने के लिए मिला है।

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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04