आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P17-0049 · भाग 17

गुरु जी, ईमानदारी से जगत-व्यवहार करना, दृष्टा भाव में रहना, कर्तापन से दूर, ईश्वर में श्रद्धा, "कुछ नहीं चाहिए" में रहना — इस साधना पथ पर जीने से कब तक आत्म-सत्य का दर्शन होगा, और तब क्या अनुभव होगा? मार्गदर्शन दें।

"कुछ नहीं चाहिए" में जिस समय आ गए, उसी समय आत्मज्ञान होगा। "कुछ नहीं चाहिए" में आ गए — तो समाधि की स्थिति, उसी के बाद आत्मज्ञान होता है। जब ज्ञान हो जाएगा तो समझ में आ जाएगा।

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वीडियो: आत्मज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी में क्या भेद है | मन क्या है / #आत्मज्ञानी #ब्रह्मज्ञानी #aadhyatmik · 2024-09-04