प्रश्नोत्तर P17-0102 · भाग 17
गुरु जी, गलती मानना और सच्ची माफी मांगना कैसा होना चाहिए? "सॉरी बोल दिया ना" कहना क्या सही है?
कोई कहता है "चलो, मैंने मान लिया" — उसने गलती नहीं मानी, गलती मानकर अपने अहम भाव को खड़ा किया कि देखो मैं कितना महान हूं। सच में गलती मानता तो तब तक माफी मांगता जब तक सामने वाला माफ ना कर दे। मैंने इसे प्रैक्टिकल किया — साधारण, फटे कपड़ों में रास्ते में चलता था, किसी का धक्का लग जाता और वह "सॉरी" बोलता, तो मैं कहता "सॉरी से काम नहीं चलेगा"; वह कहता "सॉरी बोला ना!" — मैं समझ जाता उसने दिल से नहीं, फॉर्मेलिटी में बोला था, और हंसते हुए निकल जाता। जो सच में बोलता, वह फिर कहता "भाई गलती हो गई", और सरल से सरल होता जाता। ऐसे ही पांव छूना भी अक्सर फॉर्मेलिटी है, महानता खड़ी करना है। "कुछ नहीं चाहिए" में यह बात ही खत्म हो जाती है।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21