प्रश्नोत्तर P17-0110 · भाग 17
गुरु जी, अब तक माला-जप, ध्यान सब किया, ऋषिकेश, बनारस, अयोध्या, द्वारका, उज्जैन सब तीर्थ और आश्रम घूमे, पर मन नहीं लगा। अब क्या करना है?
करना कुछ नहीं है — बस जीना है। ईमानदारी से जीना है, और ईमानदारी से जीते हुए सत्कर्म करना है — सीधी सी बात है। ईमानदारी और सत्कर्म, बस यही मूल है; वो खुद मिलने आएगा। जिस लायक आप हो, वह आपको मिल रहा है। जो मिला है उसी में बांटो, सत्कर्म फैलाओ — करोगे तो फैलेगा।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21