प्रश्नोत्तर P17-0116 · भाग 17
गुरु जी, घर-परिवार से निकल नहीं पा रहा, कुछ ना कुछ बाधा आ ही जाती है — क्या इंसान का समय भी नियति के अधीन है?
नियति बनाने वाले आप, बिगाड़ने वाले आप — तुम ही कर्ता हो; जो करते हो वही बनते चले जाते हो। गलती यही हो रही है कि बनना कुछ और चाह रहे हो और कर कुछ और रहे हो — करो तो बन जाओगे। यही राग-द्वेष है।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21