प्रश्नोत्तर P17-0141 · भाग 17
गुरु जी, हमारा दृढ़ निश्चय नहीं हो पाता, इसलिए उसी दुनिया में बार-बार नई लीला रच देते हैं — क्या करें?
जब तक कुछ प्राप्त करना है, तब तक नई लीला रचोगे। इसीलिए मैं यहां किसी को लीला रचने नहीं देता — छूट दे दूं (बातचीत, मोबाइल, अपने तरीके से जीना) तो भीड़ हो जाएगी। जगह बदलने से आदमी नहीं बदलता, जितना सीखा है वही करेगा। इसलिए यहां का मालिक कोई व्यक्ति विशेष नहीं, यहां का मालिक नियम है — और यह नियम तुम्हें आगे की लीला रचने नहीं देगा। तुम तो कुछ करोगे ही (शरीर रोको तो मन से करोगे), तो जब नई लीला नहीं रच पाओगे तो अपनी पुरानी लीला खुद खत्म करोगे — जैसे पौधे में पानी न डालो तो अपने आप सूख जाता है। इसीलिए कहता हूं कि यहां के नियम में रहने वाले की उपलब्धि पक्की है। "पड़े रहो" का मतलब है कोई नई रचना मत करो, किसी नई एक्टिविटी में इन्वॉल्व मत हो। पेड़ में पानी डाल रहे हो, पर याद रखना यह तुम्हारा पेड़ नहीं है — जैसे ही तुम रचना करना चाहोगे, तुम्हें हटा दिया जाएगा। जैसे ही लीला करना बंद हुआ और कर्ता का भाव खत्म हुआ, पिछला खत्म होगा और एक समय लीलाधारी से मिलना हो जाएगा — वह लीलाधारी तुम ही हो।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21