प्रश्नोत्तर P17-0151 · भाग 17
गुरु जी, हम हर परिणाम को पॉजिटिव या नेगेटिव मान लेते हैं — इसे कैसे समझें?
पॉजिटिव-नेगेटिव आपने बनाया है। आपका पॉजिटिव कभी आपके लिए नेगेटिव था, और फिर नेगेटिव हो भी जाएगा — कोई चीज थोड़ी देर ही मजा देती है, फिर खाक हो जाती है। जैसे भोजन पकते ही सुगंध आती है तो आप खुश होते हो; रख दो, तीसरे दिन वही भोजन नेगेटिव हो गया। इसी में तो फंसे हो — न पॉजिटिव है न नेगेटिव, ये दोनों पैदावार तुम्हारी है। अपने तरीके से हुआ तो पॉजिटिव, नहीं हुआ तो नेगेटिव — यह तुमने ऊर्जा का रूपांतरण किया। ऊर्जा सिर्फ सात्विक है।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21