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प्रश्नोत्तर P17-0180 · भाग 17

गुरु जी, नियम और पूर्ण स्वतंत्रता एक साथ कैसे चल सकते हैं? क्या नियम भी साधक के लिए एक नई जंजीर नहीं है?

नहीं, यहां ऐसा नियम बनाया गया है कि नियम ही मुक्ति का मार्ग है; जैसे-जैसे आप आगे बढ़ोगे, नियम भी छूटता जाएगा और आप मुक्त हो जाओगे। जो इस चाल से चल रहे हैं, उनका आत्मज्ञान पक्का है — बस चाल बनी रहे, कदम पीछे न जाए; आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों, एक दिन होना ही होना है, क्योंकि वो तो आपकी मूल स्थिति है — इसमें संशय ही नहीं।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21