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प्रश्नोत्तर P18-0008 · भाग 18

गुरु जी, खोज के दौरान जब लोगों ने आपको मारा, गाली दी या फटे कपड़ों के कारण अपमान किया, तब आपने क्या किया और क्या समझा?

ओंकारेश्वर में कड़ाके की ठंड में होटल वाले ने "लगेज नहीं है" कहकर कमरा नहीं दिया — वह रात एक-एक मिनट भारी पड़ी। 2019 में एक लगभग 60 वर्ष के महात्मा को "नर्मदे हर" कहा तो उन्होंने सीने पर कई बार मारा; मुझे भी गुस्सा आया, पर मैं खोज में था, मैंने उस गुस्से को देखा और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। आज भी उनके लिए कोई मलाल नहीं — वे अपनी जगह सही थे; यहां कोई गलत-सही नहीं, सब अपनी-अपनी स्थिति में जी रहे हैं। उन्होंने मुझे फटे कपड़ों के कारण मारा; चेन-घड़ी-कार होती तो कुर्सी देते — लोगों ने आवरण पर इतनी पकड़ बना रखी है। वेटिंग रूम में भी कपड़े देखकर रोका, टिकट नहीं पूछा। फटे कपड़ों ने मुझे और समाज को समझने का बड़ा मौका दिया। कोई बिना मतलब गाली देता तो कई दिन-महीने मलाल रहता, पर मैंने प्रतिवाद नहीं किया — समय और ऊर्जा बचाई, क्योंकि मुझे आगे जाना था और वे रुके हुए थे; उनसे लड़ता तो मेरी पॉजिटिव ऊर्जा उनमें जाती। आज वे घटनाएं हंसी दिलाती हैं, किसी के लिए मलाल नहीं।

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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25