प्रश्नोत्तर P18-0030 · भाग 18
गुरु जी, अंतर्मन से भाव यही रहता है कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, फिर भी परिवार और समाज के दायित्व में वे सब चीजें आकर खड़ी हो जाती हैं और अवरोध उत्पन्न करती हैं — क्या करें?
गिरने दो ना, उनका काम है गिरना; आपको तो "कुछ नहीं चाहिए"। वे तो गिरेंगी, और यहां तक गिरेंगी — एक समय ऐसा आएगा जब जीवन और मृत्यु में से किसे चुनना है, इस स्थिति तक आएंगी। ओंकारेश्वर में जब मेरे पास पूरी पृथ्वी पर जाने-रहने को कोई जगह नहीं थी, न परिवार के काम का था न समाज के, उस स्थिति में भी मुझे एक करोड़ दिया जा रहा था। ये चीजें इस स्थिति तक आएंगी।
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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25