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प्रश्नोत्तर P18-0036 · भाग 18

गुरु जी, आपकी साधना का क्रम क्या था — कितने घंटे, कौन-सी साधना, कोई अनुशासन या क्रम था?

मैं घंटों में नहीं गया, आज भी नहीं हूं। जब से निकला, मेरा सोना-उठना, कहां जाना, किससे बात करना — यह निर्णय आज तक मैंने नहीं किया; मैं समय से पार की यात्रा कर रहा हूं, रात-दिन नहीं देखा। उस स्थिति से पहले बस इतना पक्का था कि ईमानदारी से चलना है। साकार रूप में बहुत किया — हवन, सवा-सवा लाख मंत्र जाप; दरवाजे-खिड़की बंद कर हवन के धुएं में सोता था, फेफड़े तक जाम हो गए। पागलों से बात, पूजा-पाठ, श्मशान, पेड़-पत्थर — मुझे बस पहुंचना था; वह कहीं भी है, तो मैं कौन होता फैसला करने वाला कि यहां है, यहां नहीं। शुरुआत भक्ति मार्ग से, फिर त्राटक व कई साधनाएं, फिर ध्यान लगाया पर लगता ही नहीं था — बाद में पता चला कि ध्यान तो मुझसे है। आश्रम की गति तीन दिन में समझकर छोड़ दी; समय नहीं गंवाया, मूल पर काम किया। बस इतना पक्का था कि किसी को कभी तकलीफ नहीं देनी — कोई कहे एक चींटी मारने से तुम्हारी मृत्यु टल जाएगी, तो भी मृत्यु स्वीकार कर लूं।

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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25