आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P18-0042 · भाग 18

गुरु जी, जब अवधूत स्थिति तक पहुंचते हैं, तो क्या फिर मां का (इष्ट का) दर्शन संभव है?

संभव है, लेकिन उसमें कुछ चाहिए नहीं ना। आत्मज्ञान होता है तो जीवन में यह पक्का हो जाता है कि जिसकी आप भक्ति कर रहे हो, वह है। उसके बाद परमात्मा की यात्रा होती है। प्रत्यक्ष इसलिए सामने नहीं आते क्योंकि यह शरीर उतनी ऊर्जा झेल नहीं पाएगा। कहते हैं मार्कंडेय ऋषि ने नर्मदा परिक्रमा में मां से शक्ति का एहसास मांगा, एक हवा के झोंके से उनकी उंगली काली हो गई और वे बोले "बस मां, इससे ज्यादा बर्दाश्त नहीं"। कहते हैं उनकी परिक्रमा पूरी नहीं हुई — क्योंकि वे "कुछ होकर" चले थे और रास्ते में ही "कुछ नहीं" हो गए; मार्कंडेय ऋषि ही नहीं बचे तो परिक्रमा किसकी पूरी हो? और जो आज कहते हैं कई परिक्रमाएं पूरी हो गईं — वे खत्म होने चले थे पर परिक्रमा का अहंकार धारण कर बैठे।

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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25