प्रश्नोत्तर P18-0085 · भाग 18
गुरु जी, कुटिया में एक महीना रहकर घर लौटे; एक दिन अच्छा लगा, फिर व्यवहार में प्रतिक्रिया न देने से घुटन होने लगी — क्या संसार में रहना ही बेईमानी है?
कुटिया का पता है, जिस रास्ते से गए हो वही रास्ता वापस आता है — आ जाइए। संसार में उचित लगे तो संसार में रहिए — जहां आप खुश रहें, जहां आपका आत्मिक कल्याण हो, वहां रहिए। चाहे जहां रहो, आपकी स्वतंत्रता है; बस इतना ध्यान दो कि मैं यहां हूं और मेरा आत्मिक स्तर उठ रहा है। अगर ऐसी जगह रहना पड़े जहां दबाव हो, संकोच हो और आत्मिक स्तर गिर रहा हो, तो उस स्थान और उस व्यक्ति का तुरंत त्याग कर देना चाहिए — चाहे सामने कोई भी हो, अपना हो या पराया।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03