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प्रश्नोत्तर P18-0117 · भाग 18

गुरु जी, अगर सामने वाला (अपना ही) हमसे उतनी अपेक्षा रखता है जितना हम ईमानदारी से नहीं दे सकते, और बेईमानी करने के लिए मजबूर करता है, तो क्या करें?

आप बोल दो — आपकी अपेक्षा इतनी है, लेकिन मैं इतना दे सकता हूं, इससे ज्यादा नहीं। फिर भी वह ज्यादा की अपेक्षा रखता है तो ऐसे व्यक्ति का त्याग कर दो — त्याग ही परम सुख है। नाखून गड़ने लगे तो कटवा देते हैं, उंगली सड़ने लगे तो हटवा देते हैं; ऐसे रिश्तों का त्याग कर दो जो आपको गंदा कर रहे हैं। इसमें कोई दोष नहीं। दोष तब होता जब वो ईमानदार होते, आप बेईमान होते और छोड़ते — बेईमानों को छोड़ना दोष नहीं है। अगर कोई आपको बेईमानी पर मजबूर कर रहा है तो वह अपना हो ही नहीं सकता। अगर वह अनजान है तो उसे बताइए, समझाइए कि अपनी गलती देख लेना — आगे उसकी मर्जी।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22