प्रश्नोत्तर P18-0129 · भाग 18
गुरु जी, अपना और पराया क्या है?
अपना कभी पराया नहीं होता, पराया कभी अपना नहीं होता — न कोई अपना है न कोई पराया। यह भाव मन में बस जरूरत में है: जो आपकी जरूरत आपके तरीके से पूरी कर देता है वह अपना हो गया, जो नहीं करता वह पराया। इसीलिए कभी अपना भी पराया लगने लगता है — पहले आपके तरीके से जरूरत पूरी करता था, अब नहीं करता। साथ रहना और मानसिक रूप से साथ रहना अलग बात है। जब आपने ईमानदारी अपनाई और वे बेईमानी में ले जाना चाहते हैं, तो आप बेईमानी में कैसे जाओगे — बस, वे फिर आपके लिए पराए हो गए; अपने होते तो आपको ईमानदारी में साथ देते। इस तरफ कोई तभी बढ़ता है जब उसे कुछ बात समझ आती है, नहीं तो वह उन्हीं अपनों के बीच, उन्हीं जैसा होता।
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22