प्रश्नोत्तर P18-0143 · भाग 18
गुरु जी, हमारे शरीर में और दुनिया में रोज करोड़ों जन्म-मृत्यु हो रहे हैं, पर हमें फिक्र सिर्फ अपने लोगों की होती है — ऐसा क्यों? अपने बेटे के लिए सब लगा देते हैं, पड़ोसी के बेटे के लिए नहीं।
आपको फिक्र बस उनसे है जिनसे आपको मिलता है, और किसी की नहीं। दायरे में करोगे — बेटा गिरे तो सब कुछ लगा दोगे, पड़ोसी का गिरे तो उठाकर घर तक पहुंचा दोगे, सब दांव पर थोड़ी लगाओगे। वह मेरे लिए प्रिय है जो मेरी जरूरत मेरे तरीके से पूरी करता है। मां को बेटा मारकर भगा दे तब भी वह उसका भला चाहती है, क्योंकि उसने उसे पाल-पोसकर बड़ा किया, उसमें उसका स्नेह, लगाव है। घर से खबर आए कि बेटा, पत्नी, मां, भाई बीमार हैं — सबके लिए अलग-अलग भाव उठेगा; जिससे ज्यादा लगाव, उसके लिए ज्यादा।
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22