प्रश्नोत्तर P18-0151 · भाग 18
गुरु जी, शरीर में भोग-भोजन दोनों हो रहे हैं, हम क्या छोड़ सकते हैं, कहां भागेंगे — तो क्या यही स्वीकार भाव रखना है कि जो हो रहा है उसे देखना है? कृपया प्रकाश डालें।
बस बेईमानी नहीं करनी है जीवन में — मानव ने एक यही धारण किया है, बाकी सब अपने आप हो रहा है, आपकी जरूरत में हो रहा है। बेईमानी आपको करनी पड़ती है, प्लानिंग से, हर बार — पूरे होशपूर्वक करते हो तभी होती है। आप किसी मोहमाया में नहीं फंसे, कहीं नहीं फंसे — बस बेईमानी में फंसे हो। शब्दों का लेनदेन भी बेईमानी से करते हो — सामने झूठी बड़ाई, और जाते ही उसे गालियां देना — यह बेईमानी है; गाली देनी थी तो सामने देते, इतनी ताकत नहीं थी तो उस लायक बनते। आपने बस बेईमानी धारण की है, इसी से परेशान हो; बाकी रिश्ते, मोहमाया किसी से परेशान नहीं।
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22