आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P18-0189 · भाग 18

गुरु जी, आत्मा जिस घर, कुल, जगह में आई, वहां के दायित्व और संबंध तो प्राकृतिक मिले — फिर कहते हैं संसार हमने बनाया, यह कैसे?

बचपन में मेला देखने जाते थे तो माता-पिता अपनी क्षमता और आपकी मांग मिलाकर पैसा देते थे। अब मेले में जाकर आप चोरी करोगे, बेईमानी करोगे, ज्यादा खाओगे तो भरपाई आपको करनी पड़ेगी — आप घूमने आए थे और कामनाओं में फंस गए, तो गलती आपकी है। किसी ने आपको बेईमानी या गाली सिखाई क्या? जितना उपयोग के लिए मिला था उतना करते और घूम के निकल जाते; आपने कर्म के प्रति छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड कर दिया — इसमें आपका दोष है। विषय-विकारों को धारण करके अपने तरीके से बनाया हुआ यही आपका संसार है। जैसे जेल में बंद व्यक्ति के लिए बंद करने वाला जिम्मेदार नहीं, उसने कर्म किया तो दंड मिल रहा है — अब वह कहे "सारी व्यवस्था गलत है" तो वह सच नहीं।

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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29