प्रश्नोत्तर P19-0018 · भाग 19
गुरु जी, कर्मों की सजा कैसे मिलती है? क्या मृत्यु के बाद ही फैसला होता है कि कौन सी योनि मिलेगी?
सजा तो आपको दिख नहीं रही — एक बालक राजा के यहां जन्म लेकर दूध पी रहा है, एक झोपड़ी में भूखा है; कोई काना, लंगड़ा, बहरा है, कोई शरीर की पीड़ा में है — यही सजा है। जो उसका कर्म है, उससे उसे योनि मिलती है और कर्म का भोग भोगता है। मनुष्य का जामा मिला था, अपने कर्म से नीचे पशु योनि में आ गया — इससे बड़ी सजा क्या? कुत्ता बढ़िया खा-पी रहा है, पर जिस मकसद के लिए मनुष्य शरीर मिला था वह चूक गया। मानव शरीर योग के लिए मिला है, भोग के लिए नहीं — जितनी जरूरत है उसमें जीकर योग करो, यानी अपने आप को साधो, निर्विकार करो।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29