प्रश्नोत्तर P19-0030 · भाग 19
गुरु जी, जब परमात्मा की ओर दृष्टि जाती है कि हमें मुक्त होना है, तो वहां भी तो मन ही लेकर जाता है? और परमात्मा में मन उतनी ही देर लगता है जितनी देर संसार में, फिर हट जाता है — क्यों?
नहीं, आप ले जा रहे हो अपनी समझ से; मन तो आपके शरीर की जरूरत की चीजों तक लेकर जाता है — इसलिए वहां लगता नहीं। परमात्मा का तो तुम्हें अता-पता ही नहीं, तुम जबरदस्ती मन को परमात्मा में लगा रहे हो — यह भी एक धोखा है। काश सब जगह से मन को छुड़ा लेते, "कुछ नहीं चाहिए" में आ जाते, तो वही मन आपको मूल जगह ले जाता — उसका काम ही है बताना कि आपको क्या चाहिए।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29