प्रश्नोत्तर P19-0033 · भाग 19
गुरु जी, जिसे हम जड़ कहते हैं — पत्थर, गेहूं, बोतल में बंद पानी — क्या उसमें भी चेतनता है? "कण-कण में परमात्मा" का क्या अर्थ है?
नर्मदा में नहाते समय मेरे पैर से एक पत्थर टकराया, उससे आवाज आई "मुझे छुड़ा दो, मुक्त कर दो"; ढूंढा तो उस पर धागे बंधे थे, धागे खोलकर उसे मुक्त किया — तब समझ आया कि पूरी पृथ्वी में चेतनता है। जो अपने आप चल, बोल, हिल-डुल नहीं सकता उसे हम जड़ कह देते हैं, पर वह जड़ नहीं, चेतनता उसमें भी है, चाहे कम हो — प्रकृति जड़ स्वरूप नहीं, चेतन स्वरूप है। गेहूं जड़ होता तो गेहूं से गेहूं कैसे पैदा होता? पानी 100 डिग्री पर उबालकर बोतल में बंद कर दो, फिर भी कीड़े पैदा हो जाते हैं; कपड़ा बांधकर रख दो तो कीड़े निकल आते हैं; पत्थर ठंड में ठंडा, गर्मी में गर्म होता है; लोहे के तार से विद्युत प्रवाहित होती है। चेतनता हर जगह है, गंदगी में भी — पर चेतनता परमात्मा नहीं। कण-कण उससे है, जैसे बल्ब से उजाला है पर उजाले में कहीं बल्ब नहीं, फिर भी उजाला बल्ब से अलग नहीं। परमात्मा से कण-कण, परमात्मा से आत्मा, परमात्मा से जगत; उस जगत को माध्यम बनाकर परमात्मा तक पहुंचा जा सकता है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29