प्रश्नोत्तर P19-0104 · भाग 19
गुरु जी, सत्संग के बीच में उठना क्यों मना है?
नया-नया विवाह हुआ, पति-पत्नी कमरे में बातें कर रहे हैं और बार-बार कोई खटखटाता है — पापा, फिर मां, फिर भाई — तो पत्नी कहेगी "तू उन्हीं को देख ले, मूड मत खराब कर"; ससुराल में यही पति कहेगा। वैसे ही भक्ति में, प्रेम में और सत्संग में उठा-उठी मत करो, आपकी वजह से लय टूट जाती है। यह कथा या प्रवचन नहीं, किसी की उठाई वाणी नहीं — यह उतर रही है; एक भी शब्द छूट गया तो पूरा समझ नहीं आएगा, जैसे किताब की दो लाइनें छूट जाएं। इसलिए सत्संग में मल-मूत्र का त्याग करके बैठो, और सब छोड़कर बैठो। किसी को शुगर जैसी बीमारी हो, जाना ही पड़ता हो, तो पहले बता दो। और अगर नहीं हो पा रहा तो पहले अपने रोग का इलाज कराओ — प्रथम सुख निरोगी काया — फिर आगे बढ़ो। ऐसे ही जब प्रेम में बैठ सको तभी विवाह करो, नहीं तो आपके द्वारा किसी का जीवन बर्बाद होगा।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19