प्रश्नोत्तर P19-0124 · भाग 19
गुरु जी, कोई साधक नाराज होकर जाने लगे तो आप उसे रोकते क्यों नहीं?
हमारा कर्तव्य है — आप यहां आए तो आपकी व्यवस्था करना, भोजन देना, रहने की व्यवस्था देना, कोई कमी लगे तो दूर करना, और आपकी पूरी तरह रक्षा करना; मैं मिट जाऊंगा पर आपको यहां तकलीफ नहीं होने दूंगा। पर आप कहोगे मैं जा रहा हूं, तो मैं रोक नहीं सकता — रात को जाओगे तो कहूंगा कुत्ते से सावधान होकर जाना, दिन में रास्ता पूछोगे तो बता दूंगा। जब तक रहोगे, आपके हित के लिए बताता रहूंगा। आओ आपकी मर्जी, जाओ आपकी मर्जी — यह सब साधकों के लिए बना है, किसी व्यक्ति विशेष का इस पर नाम नहीं लिखा। हमारा बस भाव है कि आप लोगों का जल्दी से जल्दी आत्मिक कल्याण हो।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19