आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0130 · भाग 19

गुरु जी, प्रेम और आनंद एक ही हैं, एक सिक्के के दो पहलू हैं, या अलग-अलग स्थितियां हैं?

जैसे कली और फूल — नाम दो हैं, पर है एक ही। नहीं खिला तो कली, खिल गया तो फूल। प्रेम शुरुआत है, खिल गया तो वही आनंद। उस आनंद को बताने के लिए कोई आधार चाहिए, पर संसार में ऐसा कोई सुख नहीं जिससे उसकी तुलना कर सकूं। मेरे अनुभव में इस समाज में सबसे ज्यादा खुशी मां-बाप बनने में होती है — सुनकर आंखें भर आती हैं; पर वह इससे भी आगे है। कौन सा उदाहरण उठाएं? इसलिए पहुंचो — वह पहुंचकर ही अनुभव किया जा सकता है।

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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19