प्रश्नोत्तर P19-0180 · भाग 19
गुरु जी, द्वैत भाव कैसे समाप्त करें?
इच्छा और अपेक्षा से मुक्त करा लें। दूर से फल की दुकान देखो तो बस फल की दुकान दिखती है, कोई मतलब नहीं। पर जब लेने गए, तब छंटनी शुरू — यह कच्चा है, यह पका है, यह सड़ा है, छोटा-बड़ा, रेट कम करो। जब तक नहीं चाहिए था तब तक बस फल की दुकान थी; जैसे ही "मुझे चाहिए" आया, वहीं से भेद की शुरुआत होती है। संसार भी ऐसे ही दिखता है।
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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26