प्रश्नोत्तर P2-0137 · भाग 2
गुरु जी, नमन। (राग-द्वेष में) ‘क्यों’ का उत्तर तो मिल जाता है, पर उसे तत्क्षण त्याग देना मुश्किल लगता है।
ठीक है, तुरंत नहीं त्याग सकते, पर त्यागने का प्रयास तो करो। जैसे कोई चीज हमें तुरंत याद नहीं होती, बार-बार याद करते हैं तो याद हो जाती है; वैसे ही बार-बार प्रयास करने पर एक समय ऐसा आएगा कि आप उसमें राग-द्वेष से मुक्त हो जाएंगे।
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