प्रश्नोत्तर P2-0159 · भाग 2
मेरे भी यह बात बिल्कुल समझ में आ रही है कि मैंने अपने आप को ही जंजाल में फंसाकर लॉक कर लिया है। अब ताला लगाकर चाबी भूल गया हूं। जो कैद मैंने खुद बनाई, उसकी चाबी कैसे याद करूं?
मैंने कहा ना कि आपको विचारों के साथ (जड़ तक) जाना पड़ेगा। आपने एक जगह थोड़ी ताला मारा है — हर जगह कैद करके चाबी फेंक दी, नंबर वाले ताले भी लगा दिए; आपको गिनती ही नहीं है कि कितनी जगह ताला मारा है। लेकिन जब तक वह ताला आप खुद नहीं खोलोगे (तब तक नहीं खुलेगा), क्योंकि आप ही खोल सकते हो। और सारा बंधन मानसिक है — पहले शारीरिक प्रतिक्रिया की, फिर मानसिक बंधन हो गया। शरीर से तो भागकर हिमालय की कंदराओं में चले जाते हो, लेकिन मानसिक रूप से आपकी पूरी दुनिया आपके साथ ही है। इसीलिए कहा गया है — यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे; पूरी दुनिया आपके इसी में तो है। विचार भी आपसे हैं; जितना इकट्ठा किया, इकट्ठा करने वाले आप ही थे। तो आपकी दुनिया आप में ही है।
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