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प्रश्नोत्तर P2-0174 · भाग 2

अगर मैं जहां हूं अपने चुनाव से हूं, तो लोग हाय-तौबा क्यों मचाते हैं कि मेरे कर्म फूटे, मेरे कर्म मुझे कहां ले आए?

इसलिए कि जैसे अपराधी अपराध करता है तो सोचता है मैं बच जाऊंगा; लेकिन जब पकड़ा जाता है, तब पछताता है। जब तक मजा आता है, तब हाय-तौबा नहीं करते; तब तो उसमें घुसने की इतनी प्लानिंग करते हैं, और कुछ नजर नहीं आता। सजा के बाद पछताता है कि यह मैंने क्या कर दिया; अगर बच जाता, तो और नया, बड़ा कांड करता। तो हम खुद करते हैं, और जब उसमें तकलीफ मिलती है, तो हाय-तौबा भी मैं ही करता हूं; करने वाला भी मैं ही हूं, पूरी समझ से करता हूं। फिर यह कहना कि इसके कारण फंस गए — यह मेरी बेईमानी है। असल में आप पकड़े गए, भागने का कोई रास्ता नहीं, तो चिल्लाने लगे — बचाओ, मैं यहां से निकलना चाहता हूं।

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वीडियो: मेरे भाव को तू योगी ही समझ सकता है । #योगी · 2026-01-20